बस,वर्तमान को सुधार लो !

     अबतक आपने अपने जीवन का उद्देश्य निश्चित न किया हो तो, आज ही, अभी कर लीजिए, क्योंकि उद्देश्यहीन जीवन व्यर्थ है। 

     जीवन की दिशा निश्चित  कर लीजिए। जीवन की प्रत्येक क्रिया और प्रत्येक संकल्प उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए होना चाहिए। 

     आपको परमात्मा की ओर आगे बढ़ना है किन्तु रास्ते में लुभाने वाले विश्राम-स्थान और आनन्द-प्रमोद के धाम आनेपर लुब्ध न हो जाइये। भयानक रास्ते आने पर घबराकर पीछे न हटिये। आपके पास एक महान् शक्ति है और वह आपकी सतत रक्षा करती है।

     अनुभव करें ! आपको एक महान् प्रकाश घेरे हुए है। वह अन्दर और बाहर, आगे और पीछे, ऊपर और नीचे, नस-नस में व्याप्त हो रहा है।

     अपना ज्ञान, शक्ति और सत्ता उसमें डुबा दो, डूबने दो।

    फिर, आप व्यवहार में रहकर भी अपने जीवन में एक नई स्फूर्ति और उल्लास का अनुभव करेंगे।

     आप देखोगे कि आपका जीवन प्रत्येक क्षण परमात्मा के समीप जा रहा है।

     आप चाहें किसी भी परिस्थिति में हों, परमात्मा आपके साथ ही है। और फिर आपकी सहिष्णुता और धैर्य को हँसते-हँसते देख रहा है।

     ऐसे आनन्द के सामने क्या आप क्षुब्ध रह सकेंगे ?

     उसमें  उनके सुकोमल करकमलों के स्पर्श का सतत अनुभव करें।

     देखें ! इस समय भी उनके करकमलों की छत्र-छाया आपके सिर पर है।

     जो बीत गया है उसे भूल जायँ। जो आनेवाला है वह आपके अधिकार के बाहर है।

     इसलिए भूतकाल और भविष्यकाल में मत भटकें और अपने वर्तमान् को ही सुधारें। कहीं यह क्षण भी व्यर्थ न बीत जाय इसके लिए सावधान रहें।

     अनुभव करें कि आपका आज का दिन सार्थक बीत रहा है और आप भगवान् की ओर जा रहे हैं।  

 

new sg

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