धर्म-प्रेरणा के स्रोत-(2)

        क्या आप  ईश्वर की प्रेरणा और पूर्व संस्कारों की प्रेरणा में भेद कर सकते हैं ? पूर्व संस्कार अच्छे-बुरे दोनों प्रकार के होते हैं। उनसे समय-समय पर दोनों प्रकार की प्रेरणा भी प्राप्त होती है। यदि आप पूर्वसंस्कारों के द्वारा ही अपने जीवन को संचालित करेंगे तो आपका अन्तर्द्वन्द्व कभी मिट नहीं सकेगा। अनादि कर्म-प्रवाह से उत्पन्न संस्कार और उनसे बना हुआ स्वभाव समुद्र के बाह्य-आभ्यंतर दबाव और उथल-पुथल के समान परस्पर संघर्षरत रहते हैं। इनपर अपने जीवन को छोड़ा नहीं जा सकता। हाँ, इनसे ईश्वर की प्रेरणा को पृथक् करना विशिष्ट अंतर्दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है। 

       ईश्वर की तटस्थता एवं असंगता पर दृष्टि डाली जाय तो वह कोई स्वैच्छिक, स्वतंत्र एवं नवीन प्रेरणा नहीं दे सकता। वह आपकी अंतःकरण की उपाधि को अपने सान्निध्य मात्र से आभासित और संचालित करता है। ऐसी स्थिति में ईश्वर का नियमन भी पूर्व संस्कारानुसार ही मानना पड़ेगा। तब फिर हमें गंभीरता से यह देखना होगा कि जब हम पूर्व संस्कार अथवा उसकी उपाधि स्वीकार करके ईश्वर के द्वारा संचालित होते हैं तो हम सदा उनके द्वारा नियंत्रित कठपुतली ही बने रहेंगे; कर्म-चक्र से मुक्त नहीं हो सकते। हमें कुछ नवीन कर्म करने होंगे, जो अनादिकाल से अनवरत प्रवाहित कर्म-धारा को नया मोड़ दे और हमारी यात्रा को मुक्ति के लिए उन्मुख करे। कम-से-कम वह ऐसी तो होनी ही चाहिए जो स्थूल देह और उसके सम्बन्धों को शिथिल करके सूक्ष्म शरीर को प्रधानता दे। परलोक,आन्तर रसास्वादन,समाधि अथवा शुद्धिकी भावना जाग्रत् करके सत्य तत्त्व की जिज्ञासा की ओर ले जाय। इसके लिए नवीन क्रिया-कलापकी प्रेरणा क्या आप पूर्व संस्कारों पर छोड़ देते हैं। अथवा इसके लिए कोई नवीन स्रोत ढूंढते हैं ? 

                                                                                                                        (क्रमशः)

new sg

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: