सर्व और केवल

सर्व कहना और केवल कहना इसमें फर्क है। एक कहना और अद्वय कहना इसमें फर्क है। इस बात को समझना चाहिए।

     सम्पूर्ण संख्याओं की जो समष्टि होगी उस समष्टि को सर्व बोलेंगे बहुतों के जोड़ को सब कहते हैं और जिसमें बहुत्व नहीं हो उसको केवल कहते हैं। परमात्मा केवल है-अकेला है। जिसमें एक बटे दो न हो, अकेला हो। जिसमें एक-एक दो नहीं, वह अकेला, अर्थात् अद्वय ब्रह्मतत्त्व।

     जैसे एक-एक दिन, एक-एक रात गिनते चले जाओ तो सम्पूर्ण दिन और रातों की जो समष्टि होगी उसको सर्वकाल कहेंगे। लेकिन जिसमें यह काल नहीं है वह अकाल है।

     एक-एक इंच, फिर एक-एक फुट, फिर एक-एक गज, एक-एक मील इस प्रकार जोड़ते-जोड़ते जो देश की समष्टि होगी, जिसके बाद देश का नाप नहीं हो सकता। छोटे – से छोटा देश  और बड़े-से-बड़ा देश- यह देश विस्तारक का सूचक है और इस देश समष्टि को सर्व देश कहते हैं। यह सर्व देश जिसमें कल्पित है, जिससे यह सर्व देश नहीं है उसे परिपूर्ण अद्वय कहते हैं।

     ये कण, कण, कण- सब कणों को जोड़ दिया ; एक-एक कण भी शेष नहीं रहा, भविष्यकाल में होने वाला कण भी बाकी नहीं रहा, वर्तमान में बिखरा हुआ कण भी बाकी नहीं रहा, इन कणों की जो समष्टि होगी वह होगी सर्व वस्तु। वह जिस प्रकाश में दिखाई पड़ रही है, उन सबका जो अधिष्ठान है, जिनमें ये वस्तुएँ नहीं हैं, उनके अत्यन्ताभाव का जो साक्षी-अधिष्ठान है उसको कहते हैं ब्रह्म। प्रत्यकचैतन्याभिन्न ब्रह्म तत्त्व में  यह जो काल सृष्टि है  कला,- काष्ठ, मुहूर्त, क्षण आदि  और उसमें जो यह देश सृष्टि  है इंच  फुट आदि और उसमें जो वस्तु सृष्टि है- अणु, परमाणु आदि ये सब जिसमें भास रहे हैं, जिसमें कल्पित हैं, जो इनका अधिष्ठान है, जो इनका प्रकाशक है, और जो इनके अत्यन्ताभाव का भी अधिष्ठान और प्रकाशक होने के कारण  इनसे सर्वथा रहित है; उस आत्मा को ब्रह्म कहते हैं, उस आत्मा का नाम ब्रह्म है और ऐसा यह अपना आत्म ब्रह्म है।  

new sg

 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: