वेदान्त की सरलता

आपका ‘मैं’ क्या है ? क्या आपने समझ बूझ कर अपने को देह माना है ?

अच्छा, आइये, एकबार अपने ‘मैं’ को देह में से निकाल लीजिये। आपका यह  ‘मैं’ केवल ज्ञान है। न देह, न कर्मी। न भोगी, न योगी। न संसारी, न परिच्छिन्न। 

अपने ‘मैं’ को देश, काल, वस्तु से अपरिच्छिन्न  ब्रह्म समझ लीजिये,मान लीजिये। 

अब आप ब्रह्म हैं। आपकी उम्र, लम्बाई, चौड़ाई या तात्त्विक स्वरुप में यह प्रपञ्च क्या है ?

आपमें कुछ नहीं है या आप सब कुछ हैं। न कुछ टूटा, न फूटा, न बिगड़ा। उलटी बुद्धि सुलटी हो गयी। भ्रान्ति मिट गयी। सम्पूर्ण प्रपञ्च और उसमें भासमान देह भी आप ही हैं। परन्तु अब वह ‘अहं’ रहित जीवन्मुक्त है। 

new sg

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