चिन्तन

     परमात्मा का यह संकल्प नहीं है कि सबका उद्धार हो जाये। उसका यह संकल्प है कि जो उसके द्वारा उपदिष्ट मार्गपर चले उसका उद्धार हो जाये ; अन्यथा ईश्वर की सृष्टिलीला का लोप हो जायेगा। 

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      सत्य पदार्थ का निरूपण करनेवाला ग्रन्थ ऐतहासिक, भौगोलिक अथवा कर्तृगत महत्त्व से महान् नहीं हुआ करता। उसके कागज, छपाई सफाईका भी उसपर प्रभाव नहीं पड़ता। वह जिस देश में, जिस काल में, जिस व्यक्ति के द्वारा, चाहे जैसे प्रकट होता है, अपने वर्ण्य पदार्थ के कारण महान् होता है। निश्चित रूप से  अध्यात्म रामायण आदि ग्रन्थ जनता के शाश्वत उपकारी हैं। हीरा किस समय, किस खान से, किसके द्वारा प्राप्त किया गया, यह मत देखो, उसका सच्चा मूल्याङ्कन करो। 

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      भुशुंडि – चरित्र अत्यन्त प्राचीन है। एक भुशुंडोपनिषत् भी है। योगवासिष्ठ में भुशुंडोपाख्यान है। वक्ता की आकृति, जाति आदि नहीं देखी जाती। उसके द्वारा वर्णित भगवद्गुणानुवाद से प्रेम करना चाहिए। पक्षिराज गरुड़ पक्षिचाण्डाल से भगवद्गुणश्रवण करते हैं। आवाज भी सुरीली नहीं। सुन्दर आकृति, उत्तम जाति सुरीली आवाज को छोड़ कर परमात्मा का श्रवण करो। 

 

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