‘साधन-पथ’

कृपण कौन ?

भगवान् भले ही न मिलें, पर संसार न छूटने पाए- ऐसी चेष्टा वाला। 

बुद्धिमान् कौन ?

जो परमात्मा को पाने के लिए संसार छोड़ने को उद्यत है। 

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ध्यान के पॉँच विघ्न 

  1. लय – मन का सो जाना।
  2. विक्षेप- मन का चञ्चल होना। 
  3. रसास्वाद – मज़ा लेना, भोक्ता होना। 
  4. कषाय – रागास्पद या द्वेषास्पद का स्मरण। 
  5. अप्रतिपत्ति – ध्येय के स्वरूप को ठीक-ठीक ग्रहण न कर सकना। 

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    साधना का मार्ग प्राइवेट है। अकेले चलने का, अन्तरङ्ग मार्ग है। इसमें सगे-सम्बन्धी, स्वजन परिजन को साथ लेकर नहीं चला जा सकता। ये सब तो यहीं छूट जाते हैं। संसार के सब रास्ते, सब सम्बन्ध जहाँ समाप्त हो जाते हैं, साधन-पथ वहीं से प्रारम्भ होता है।  

new sg  

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