विचारणीय :

       दिन के साथ रात और रात के साथ दिन लगा ही रहता है। यह कभी नहीं हो सकता कि केवल दिन-ही-दिन हो या केवल रात-ही-रात हो। चलते हुए रथ का पहिया नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे जाता ही है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य का भाग्यचक्र बदलता रहता है- कभी अच्छे दिन आते हैं, कभी बुरे दिन आते हैं। साधारण लोग अच्छे दिनों में आसक्त हो जाते हैं, बुरे दिनों से घबरा जाते हैं। वे अच्छे दिनों में प्रमाद करने लगते हैं और बुरे दिनों में पागल हो जाते हैं; परन्तु महापुरुष दोनों ही परिस्थितियों में एक-से रहते हैं, बुरे दिनों को शुभ दिनों के आगमन की सूचना समझते हैं और शुभ दिनों को बुरे दिनों का पूर्व रूप। वे दोनों को ही एक ही वस्तु के दो पहलू समझते हैं और इसी से समत्व में स्थित रहते हैं।

*********************

      जो होनेवाला होता है, वह होकर ही रहता है। भगवान् की इच्छा,जीवों का प्रारब्ध और प्रकृति की अनुलङ्घनीय धारा का किसी प्रकार उल्लङ्घन नहीं किया जा सकता। सत्य-असत्य, धर्म-अधर्म, शीत-उष्ण और पाप-पुण्य का किसी प्रकार मेल नहीं हो सकता। न्याय और अन्याय में कभी समझौता नहीं हो सकता। ये सब बातें अटल हैं; इनके विपरीत जो चेष्टा करते हैं, वे कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते।

new sg

 

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: